राजस्थान के उदयपुर में स्थित मेनार पक्षी गांव बनेगा आर्द्रभूमि जानिए क्या है असली वजह ?

 

    प्यारे दोस्तों राजस्थान के पक्षी ग्राम के रूप में मान्यता प्राप्त उदयपुर जिले के मेनार गांव को राजस्थान की नई आर्द्रभूमि के रूप में अधिसूचित करने का निर्णय लिया गया है। इससे यह फायदा होगा की मेवाड़ क्षेत्र के लोगो को इस ग्रामीण क्षेत्र को रामसर स्थल का दर्जा मिलने का मार्ग बढ़ेगा।

 

Rajasthan's Menar  wetland

मेनार वेटलैंड

    राजस्थान के उदयपुर में स्थित मेनार गांव की दो झीलें ब्रह्मा और ढांढा हर साल बड़ी संख्या में प्रवासी पक्षियों की मेजबानी करते हैं। वन विभाग की टीम ने मेनार को आर्द्रभूमि के रूप में अधिसूचित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है, जो तलछट और पोषक तत्वों के भंडारण में इसकी भूमिका को पहचानेगी और इससे संबंधित झीलों के संरक्षण में स्थानीय अधिकारियों की मदद भी करेगी।

 

    प्यारे दोस्तों जलीय पौधों को बढ़ाने और आर्द्रभूमि की स्थिति के साथ जैव विविधता की रक्षा के लिए खासकर दो झीलों को मजबूत किया जाएगा। सर्दियों के मौसम में दोनों झीलों में स्थानीय और प्रवासी पक्षियों की 150 से भी अधिक प्रजातियां निवास करती हैं। इनमें ग्रेटर फ्लेमिंगो, व्हाइट-टेल्ड लैपविंग, पेलिकन, मार्श हैरियर, बार-हेडेड गूज, कॉमन टील, ग्रीनशैंक, पिंटेल, वैग्टेल, ग्रीन सैंडपाइपर और रेड-वॉटेड लैपविंग भी शामिल हैं। मध्य एशिया, यूरोप और मंगोलिया से प्रवासी पक्षियों के आगमन के बाद इस गांव में पक्षी प्रेमी और पर्यटक काफी अधिक की संख्या में आते हैं।

 

राजस्थान में अन्य रामसर स्थल

    आप सभी को यह जानना बहुत ही जरुरी है की वर्तमान में राजस्थान में दो आर्द्रभूमियों को रामसर स्थलों के रूप में मान्यता प्राप्त है-

1. भरतपुर जिले में केवलादेव घाना

2. जयपुर जिले में सांभर साल्ट लेक

 

आर्द्रभूमि क्या हैं?

    मेरे प्यारे दोस्तों आर्द्रभूमि एक इस प्रकार का क्षेत्र हैं जहां पानी पर्यावरण और इससे संबंधित पौधे और पशु जीवन में प्राथमिक नियंत्रण कारक है। आर्द्रभूमि को इस प्रकार से भी परिभाषित किया किया जा सकता है की "स्थलीय और जलीय पारिस्थितिक तंत्र के बीच भूमि संक्रमणकालीन जहां पानी आमतौर पर सतह पर होता है या भूमि उथले पानी से ढकी होती है"।

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